रचनाकार– रोयाण्टर मण्डल

ईजोतक राईत कारी लगै,
पुर्णिमामे सेहो अमबसिया एलै ।
तरपैत तरपैत दिन राईत बितै,
जौ अपने अपन पर राज नितिक भेलै ।।

कक्रा पर विश्वास करु,
चक्रब्यु जे अपने लगाबै ।
बित बित पर काट बिछाबै,
अपना बचके लेल आरोप लगाबै ।।

सीमा सबता भुईल गेलौ,
अपनो पराई भेलै ।
अपन बेगना दोसर अपन भेलै,
अपन तित दोसर मिठ भेलै ।

कक्रा पर विश्वास करु,
चक्रब्यु जे अपने लगाबै।

झुठक बोली हक्कित भेलै,
बोल्लो बात बेबोलल् भेलै ।
गुथनी स गाईथ रणनिती बनेलकै,
अन्त काल जे सोच लकै वोहे केलकै ।

तैके बाद,
महाभारत भेलै,
पाण्डब र कौरब अपने बनलै ।
चरित्र चित्रणमे नै कोनो कमी भेलै,
निर्देशक औरे निर्देशन करैत रहै ।

तिर धनुष बनाक युद्धक तयारीमे,
चारु वोर स चक्रब्युके अन्वेशनमे,
चलबाक लेल आतुर मे,
मुदा हम फैसे गेलौ ।

चक्रब्युमे हम प्रवेश केलौ,
बाणक तिर हमरा लगबै केलै ।
सोचलहा बात सेहो करबे करकै,
तबो महात्मा अपनाके कहेबे केलकै ।

हे भगवान तु देखबे करिह,
जकर आश ओकर आश जुलेबे करिह ।
वोकर मनक बात पुरा करेबे करिह,
हमरा बेगना बनाक रखबे करिह ।

हमरो आश आब बेआश बनैत रहै,
जौ अपने बेअपन जका सौचैत रहै ।
हमर जिवन कलकिंत करैत रहै,
हमरा सब दिन थु थु करैत रहै ।

बियोगमे जिन्दगी हमर बितबैत रहै,
राईतमे सेहो बौवाईत रहलौ ।
उ दिन सबता भुईल गेलै,
शिक्षा के लेल जे कि कि करैत रहै ।

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