सुधा मिश्र

माघक संक्रातिके तिला संक्राति मनायल जाइत छै।तिला संक्रातिके मकर संक्राति सेहो कहल जाइत छै।अहिदिन स सुर्य नारायण मकर राशिमे प्रवेश करैत छथिन।

जनकपुर स किछु दुरि हटिक धनुषाधाम छकि।जाहिठाम मकर संक्राति खुब धुमधाम स मनायल जाइत छै।मकर संक्रातिमे धर्मावलम्बीलोकनि मकर नहाय धनुषके दर्शन करैत छथि।भगवान श्री राम सिया स विवाहक लेल राखल गेल धनुष पिनाक जे उठेलखिन त तीन टुक्री भगेल रहे।एक टुक्री स्वर्गमे खसलै ।दोसर टुक्री पातालमे त तेसर टुक्री धनुषाधाममे खसल मान्यता रहिआयल छकि।तिला संक्रातिक दिन धनुषक दर्शनलाय दर्शनार्थी सभ भोरे स लाइन लागल रहैत छथिन।धनुष दर्शन कयलास महाकल्याण होइत छकि से जनमानसमे विश्वास रहिआयल अछि।

मिथिलाक हरेक पावनितिहारक अपन किछु खास पहिचान होइत छै।सभ स पैघ बात हर पावनि धरती सँग जुरल रहैत छै।जुरशितलक बडी भात , बर्साइतक आम , घडीक गेन्हारी साग , चौरचनक ओलक चटनी , छठिक ठेकुवा भुसबा , लबानक चुरादही,पुसक बगिया त तिला संक्रातिमे तिलबा।

तिला संक्रातिमे तिलके विशेष महत्त्व देलगेल छकि।तिल दानके विशेष रुपमे लेल जाइत छै।अहिपावनिमे मुरहीक लाई ,चुराक चुरलाइ त तिलक तिलबा बान्हल जाइत छै।पुर्णरुपे शुद्ध अर्गानिक ।कुनो तरहक मिसाबट नहि।गुर आ मुरही स लाई बनल।तहिना गुर आ चुरा स चुरलाइ।तिल आर गुर स तिलबा।

आहि स बीसपच्चीस वर्ष पहिनक बात हेतै।गामघरमे कहल जाइत छलै जे तिला संक्राति दिन भोरे भोरे पोखरिमे डुबकी लगा निचा होतरैछै त ओकरा तिलबा भेटैछै।संयोग स एकबेर हमहु तिलासंक्राति मनबके अवसर गामपर दाइबाबा सँग पेलौ। बड उत्साह भरल रहल पावनि।बहुत किछु जानक अवसर प्राप्त भेल।महादेव पार्वतीक कथा सुनक सुअवसर प्राप्त भेल।जाहि कथा अनुसार महादेव पार्वतीक सँग घुमघाम करैत मिथिलांचलमे पँहुच गेल रहथिन।खेतमे तिल फरल देख तिल सुररिक खाय लेने रहथिन।

बड दुख लगैय बदलति परिवेशके देखि।नहि आब ओहन दाइएबाबाक सिनेह भेटैत छै त नहि ओहन पोतापोतिए सिनेहगर रहिगेल छकि।जहाँ हमसभ दाइबाबा लग रहलाय लालायित रहैत छलौ।मुदा नहि जाइन कि भगेल आजुक जेनेरेशनके ? हितगर चिज स दुरी त अहितगर चिज सँग संग।सब स प्रियगर सोसल मिडिया ।निःसन्देह सोसल मिडिया बड नीक चिज छै ज उपयोग कर जानी तब।ज सोसल मिडिया अँहाक बसमे अछि त ।नहि त अकरा सन बेलाय किछु नहि।

छोटेटाके गाममे अपने पोखरि छल।भरिगाममे एकेटा पोखरि भेलाक कारण सभहक सिनेह ओकरा भेटल छलै।बहुत साफ।बहुत व्यवस्थित ।हमहु सभहक हुलमे सामिल भय नहायक एलौ।बाबा दलानपर घुर लग सबगोटे सँग बैसल छलखिन।हमरा नहायलदेखि अपना लग बजा बैसबति छथि।ओहिठाम बैसल एकटा काका पुछिदति छथि कायटा तिलबा भेटल पोखरिमे ?

हम बाबा स सटि धिरे स फुसफुसा हुनका कहैछियनि।सभगोटा बड झुठा छथिन।पोखरिमे तिलबा नहि भेटैछै।हम कायबेर डुबकी मारिक हथोरल।थालमाटि मात्रे रहैछै।घुरपर ठहका बजरि जाइत छै।बाबा आँखिक ईशारा स सभके चुपरहलाय कहैत आँगनमे आवाज दतिछथिन।
` सुनै छी।किछु तिलबा सब लेने आउत।´

आँगनमे तुलसीमे जल ढारैत सबटा बात सुनिलेने रहैत छै दाइ।फुलौकीमे तिलबा , लाई आर चुरलाइ आनि बाबाके बढबति कहैत छथिन।

` के नेनाके एनाक फुसिए कहिदेलक ? केहन सोझ मोन छै अकर।ईह अहिठल दुनियाँमे केना कि करतै इ सीधा मन भेल हमर बच्चा ? केना अकर राजकाज चलतै ?´

` नीक जाक चलतै।सब स नीक।सोझ मोनक मानुषके राम जे रखबार होइत छै।´

हमरा स ईशारा मे पुछि हमर मोन पसन्द एकटा गेन्द जाक गोल तिलबा आ एकटा फुल सन गढल तिलबा दुनु हाथमे दअ आउर ओहिठाम रहल सभके बाँटिदति छथिन।

तिला संक्राति दिन घरपरिवारक जेठ तिल मिट्ठा लय सभके प्रसाद रुपमे दति पुछलथि ,` हमर तिल बहब ?´

जबाबमे प्रसादरुपे तिलमिट्ठा ग्रहण करैत छोटसभ कहलक, ` जी बहब।´
ईह चलन बड बेजोड छकि।ईह चलन छोटसभके जिम्मेवार बन सिखबति छै।छोटसभमे जेठक प्रति अपन कर्तव्यक बोध होइत छै।

अहिदिन भोजनमे सेहो विशेष परिकार बनायल जाइत छै।तिला संक्रातिके खिचडी खायल जाइत छै।कहबी छै
खिचडीके चारि यार
घी दही पापड आचार।

तिला संक्राति स कुमारि कन्या सभ तुषारी टेकैछथि।नित दिन ब्रम्ह मुहुर्त कौवा बाज स पहिने उठि भगवान गौरीमहादेवके आराधना कय तुषारी पुजैत छथि।

तहिना नवविवाहिता सभ साँझ टेकैछथि।नवविवाहित कन्याके सासुर स जराउर आयल।गाम समाज एकठाम भेला भेलथि।मनोरञ्जन भेल।पावनितिहारक उल्लास बढल।

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